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जैन समाज कि एक कुरीति- आरती

Posted On 12 Jul, 2016 Celebrity Writer, Hindi Sahitya, Junction Forum में

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जैन समाज कि- एक कुरीति आरती

जैन समाज के मुख्य दो घटक है श्वेतांबर व दिगंबर इन दो घटको मे भी कही पंथ है जेसे श्वेतांबर संप्रदाय मे मूर्तिपूजक , तेरापंथी , स्थानकवासी व दिगंबर संप्रदाय मे तेरापंथी , बीसपंथी व अन्य काफी पंथ मुझे ज्ञात नही की इन पंथो की रचना कब व केसे हुई ! मगर स्वाभाविक रूप से पंथो की रचना कुछ धर्म गुरुओ के आपसी विचारधारा मे मतभेद होने से ही हुई होगी ! खेर मुझे इस विषय पर आज चर्चा नही करनी की ये पंथो का विस्तार केसे हुआ ! आज मुख्य मेरी विचारधारा दीपक से आरती की जाती है क्या जैन धर्म जो अहिंसा के मूल सिदान्त को मानता है उपयुक्त है या नही ! मेरी सोच से दीपक से आरती करना जैन सिद्धांत के अनुकूल नहीं है ! आरती के लिए रात्रि में दीपक जलाना पड़ता है ! जो किसी भी तरह से उचित नहीं है ! रात्रि का समय तो सामायिक का है ! सामयिक के समय को टालकर उसको आरती के काम में लगाना किसी शास्त्र से सिद्ध नहीं होता ! मच्छर/कीट/पतंगे इत्यादि चतुरिंद्रिय जीव प्रकाश के व्यसनी होते हैं वे आकर्षित होकर दीपक की लौ की ओर खिंचे चले आते हैं, और मृत्यु को प्राप्त होते हैं !अब कोई कहे कि घर में खाना बनाते हैं, या रौशनी करते हैं, उसमे भी तो जीवों का घात होता है, फिर मंदिर के कार्य में क्यों टोकते हो ?मेरे मंतव्य से
घर के कार्यों में धर्म का अनुसरण नहीं होता है, किन्तु आरती से जो जीवों का घात होता है वह धर्म के नाम पर होता है ! अतः आरती करना किसी विज्ञ और दयालु पुरुष का ध्येय नहीं हो सकता !
“देव धर्मतपस्विनाम् कार्ये महति सत्यपि !
जीव घातो न कर्तव्यः अभ्रपातक हेतुमान !!
याने,
देव, धर्म और गुरुओं के निम्मित भी महान से महान कार्य पड़ने पर जीव घात नहीं करना चाहिए ! जो इसकी परवाह नहीं करते वे जिनेन्द्र भगवान के वचन रूपी चक्षुओं से रहित हैं !जीव-घात नियम से ही नरकादि गतियों में ले जाने वाला है !और ऊपर से अगर धर्म मान कर ऐसा कार्य किया जाए तो उसमे “मिथ्यात्व’ का दोष भी जोड़ लें, जो कि अनंत संसार का मूल कारण है ! अन्य स्थानों में किया गया पाप मंदिरजी जाकर कट जाता है, किन्तु धर्मस्थान में किया हुआ पाप, वज्र लेप समान है ! जिसे कोई नहीं काट सकता !
याद रखें :- आरती का सम्बन्ध दीपक से कदापि नहीं है !
आरती का अर्थ केवल स्तुति और गुणगान से ही है, उसके अलावा कुछ भी नहीं !
- अब कोई कहे की मंदिरजी में बड़े-बड़े बल्ब/लाइट/जनरेटर जलते हैं रात में तो उससे भी तो तीव्र हिंसा होती है ! इसके २ समाधान बनते हैं :-
१ – आज के भौतिकवादी हो चुके समाज में श्रावकों की इतनी श्रद्धा नहीं रही जैसी पहले हुआ करती थी ! यह पंचम काल का प्रभाव ही है कि यदि मंदिरों में बल्ब नहीं जलाये तो स्वाध्याय तो दूर मंदिरजी आने-जाने का क्रम भी लुप्त हो जाएगा!
जबकि विवेकवान पुरुष तो रात्रि के समय में सब आरम्भ-परिग्रहों से विरक्त होकर सामायिक आदि क्रियाओं में लग जाते हैं !
दूसरा और सबसे मुख्य तथ्य
२ – मंदिरजी में बल्ब/लाइट जलाना धर्म नहीं माना जाता, किन्तु दीपक जलकर आरती करने को लोग धर्म मानते हैं, और उल्टी/विपरीत मान्यता होने के कारण मिथ्यात्व ही है ! हमे विवेक का परिचय करते हुए, इस प्रचलित प्रथा को सही दिशा देने का प्रयास करना चाहिए तथा रूढ़िवाद, अज्ञानता और पक्षपात को छोड़कर जैसा भगवान ने बतलाइं वैसी ही क्रियाएँ करनी चाहिए !
- पर्वों/आयोजनों में 108,1008 दीपकों से महाआरती की जाती है !
- कभी कभी सुनता हु अमुक महाराज जी की 25,000 दीपकों से महाआरती की जाएगी ! कल्पना से परे हैं ऐसे भक्त और ऐसे मुनि … – जहाँ “अहिंसा परमो धर्म” बताया है, वहां हिंसा का अनुसरण करती हुई किसी क्रिया को कोई साधु या कोई श्रावक कदापि नहीं कर सकता ! किन्तु फिर भी बहुत कर रहे हैं ! पंचम काल प्रभावी हो रहा है ! – अखंड ज्योत जलाना भी मूढ़ता है ! वैष्णव परंपरा की नकल मात्र है ! कृपया विवेक से काम लें !!! जो पहले से होता आ रहा है ज़रूरी तो नहीं कि वो सही ही हो ! वेसे श्वेतांबर परंपरा के तेरापंथ , स्थानकवासी परंपरा मे मूर्ति पुजा को मान्यता नही है ! साधना , स्वाध्याय बिना पुजा के भी संभव है ! जैन समाज के साधू , संतो , आचार्यो , श्रावकों को इस गहन विषय पर विचार करना चाहिए ! क्या आरती , द्रव्य पुजा , अभिषेक आदि से हिंसा तो नही हो रही है जो जैन धर्म का मूल सिदान्त है ! जैन समाज को आज सिर्फ हिंदुस्तान ही नही विश्व मे अहिंसक के रूप मे जाना जाता है ! जहा अहिंसा परमो धर्म का ध्वज फहराया जाता है !
उत्तम जैन (विद्रोही )


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Viney के द्वारा
July 20, 2016

Thank you so much for your wonderful blog and answers. Quick question: I have Luteal Phase Defect, cannot get pregnant. I begin spotting about 9 days after ovulation, even when on Femara, incejtables, and Endometrin (once a day). Nothing is stopping the bleeding from starting 9 days after I ovulate. Should we up the dose of the Endometrin next time, or is there something else we can try to get pregnant? Thank you!


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